शब्दों का ये कारोबार मेरे बस की बात नहीं,
मुझे समझना हो तो बस तुम मेरी आँखें पढ़ लेना,
दिल में छुपे हर राज़ को ये
पल में तुमको समझा देंगी..
बिन पूछे बिन बोले तुमको दिल का हाल बता देंगी..
चेहरे पर जिन भावों को लाने से मैं कतराती हूँ,
पल भर में वो भाव सभी बैठे बैठे समझा देंगी..
जब मन हो मेरा गुमसुम सा
तो चीख चीख कर बोलेंगी,
जब दिल में कोई हो ख़ुशी छुपी
तो हौले से मुस्का देंगी..
रो देंगी धीमे धीमे से जब याद तुम्हारी आएगी,
जब आओगे तुम सामने तो
खुद झुक के ये बतला देंगी,
गर इनकी भाषा पढ़ लोगे तो जान मुझे भी जाओगे
वर्ना इतना भी जान लो मेरा पार कभी ना पाओगे..


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