Wednesday, March 10, 2010

महिला बिल पर

महिला दिवस चला गया और १४ सालों से जिस बिल के पारित होने की आस सरे देश की महिलाएं लगाये बैठी थी वो महिला आरक्षण बिल भी राज्य सभा में १८६ में से १८५ वोटों के साथ पारित हो गया. दुनिया भर के विरोध और बदतमीज़ी संसद में दिखाई दी. यहाँ तक की एक विरोधी सांसद ने ये तक कह डाला की वह इस बिल के विरोध में कोई भी हद पार करने को तैयार है. पर इतना सब आखिर किस लिए?
वह महिला जिसे नारायणी माना जाता है, जो बिना किसी मांग जांच के अपना सारा जीवन अपने पिता तथा पति के परिवारों के लिए न्योछावर कर देती है, जो साक्षात शक्ति का प्रतीक है, उसे कमज़ोर बता कर आरक्षित करने के लिए?
माफ़ कीजियेगा शायद आप सोचें की ये एक सर्व सुविधा सम्पन्न युवती की वाणी है पर वास्तव में ये हर उस स्त्री की आवाज़ है जो खुद के स्त्री होने पर गर्व करती है. मुझे किसी आरक्षण की ज़रूरत नहीं है. मुझमे इतना माद्दा है की मैं अपने दम पर उस संसद की अध्यक्षता कर सकूँ जिसकी सांसद बनने के लिए मुझे १५ सालों तक तरह तरह की कठिनाइयाँ एवं विरोध सहने पड़े. मैं नहीं चाहती कि लालू यादव जैसे उन पुरुषों को बल मिले जो अपनी जगह अपनी अर्धांगिनी को सत्ता पर कठपुतली बना के काबिज़ कर दें और सुख भोगें.
मुझे मात्र इतना चाहिए कि अपनी रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में जो सुविधा मैं पाती हूँ वोही मेरे जैसी उन असंख्य महिलाओं को मलें जो इस सब का मतलब भी नहीं जानती. संसद में आने से पहले उनकी खुद कि एक समझ विकसित हो और जब वो आवाज़ उठाएं टॉम वो खुद उनकी आवाज़ हो ना कि उनके पति, पिता अथवा पुत्र की.
दो लाइनों में मात्र इतना कि मुझे आप खली बुनियाद दें उसपर कैसे और क्या महेल बनाने हैं वो मुझे आता है.
धन्यवाद

Sunday, February 28, 2010

बुरा न मनो होली है

सर्वप्रथम तो आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं. अभी तो सुबह सुबह का समय है लगभग सभी होली की तैयारियों में जुटे हुए होंगे. मुझे तो खैर लड़की होने के कारण होली खेलने की इजाज़त नहीं है इसलिए मैंने सोचा क्यों न आप सभी की होली के लिए मंगलकामना करूँ. कल रात भारत की पाकिस्तान पर विजय ने आज की होली में चार चाँद लगा दिया. ऐसा लगा जैसे भारत हाकी में फिर से पहले जैसा स्थान प्राप्त कर लेना चाहता है. इस जीत के साथ ही वो सारी दुनिया को ये जाता देना चाहता है कि वो अब किसी से हारने वाला नहीं है. लेकिन शायद वो उल्लास कहीं नहीं था जो तब दिखाई देता है जब क्रिकेट मैच जीता जाता है. खैर मैं इस विजय से काफी खुश हूँ और क्युकी मैं खुद भी इस खेल क बारे में बोहोत कम ज्ञान रखती हु तो इस बारे में किसी पर टिप्पणी करना चित नहीं. अंत में केवल

"CHEER'S TEAM INDIA" "HAPPY HOLI"

Saturday, February 27, 2010

kya yahi hai media?

आज मीडिया खबर के ऑनलाइन इशु में दो खबरें पढ़ीं और दोनों को ही पढ़कर आज तक जितनी पत्रकारिता की पढाई की थी सब धरी की धरी रह गयी. अब लगता है आपको कुशल पत्रकार होने के लिए बाहुबली भी होना पड़ेगा और गाली गलौच का स्पेशल कुरसे भी करना पड़ेगा वर्ना आप यहाँ टिक नहीं सकते. आज तक तो हम पत्रकारों ने मिलकर राजनीती को खूब धोया है लेकिन अपने ही आँचल में आग लगा बेठे हैं हम लोग. जहाँ एक तरफ आदर्श पत्रकारिता करने और घर चलने की इच्छाओं का ज़बरदस्त मर्दन है जो कुंठा उत्पन्न करता है ऊपर से रोज़-रोज़ की गालियाँ और झाड क कारण पत्रकारों क सब्र का बांध टूट रहा है वहीँ दूसरी ओरपत्रकारिता में भी बाहुबल प्रदर्शन ने घुसपैठ कर दी है और पैसों की खातिर स्ट्रिंगर को पीटा जा रहा है. कुल मिलाकर आज पत्रकारिता नाम की कोई चीज़ नहीं है बस सब पैसों का खेल है. अब पत्रकार कोई सच्चाई आपके सामने नहीं परोसना चाहते वो सिर्फ वह तथ्य आपके सामने रखना चाहते हैं जिनसे उनकी जेब गर्म होती हो. पत्रकारिता बाज़ार तो बोहोत पहले ही बन गयी थी लेकिन परदे क पीछे का सच सामने आ गया है और इस चौथे स्तम्भ के लिए हानिकारक हो सकता है. लिखना कुछ और चाहती थी लेकिन भावनाओ के बहाव में जाने क्या क्या लिख बैठी. पहला ब्लॉग है और लिखने का कोई ख़ास शौर भी नहीं है मुझमें तो गुस्ताखियाँ माफ़ करें और सुधार के सुझाव भी दें धन्यवाद.