Saturday, February 27, 2010
kya yahi hai media?
आज मीडिया खबर के ऑनलाइन इशु में दो खबरें पढ़ीं और दोनों को ही पढ़कर आज तक जितनी पत्रकारिता की पढाई की थी सब धरी की धरी रह गयी. अब लगता है आपको कुशल पत्रकार होने के लिए बाहुबली भी होना पड़ेगा और गाली गलौच का स्पेशल कुरसे भी करना पड़ेगा वर्ना आप यहाँ टिक नहीं सकते. आज तक तो हम पत्रकारों ने मिलकर राजनीती को खूब धोया है लेकिन अपने ही आँचल में आग लगा बेठे हैं हम लोग. जहाँ एक तरफ आदर्श पत्रकारिता करने और घर चलने की इच्छाओं का ज़बरदस्त मर्दन है जो कुंठा उत्पन्न करता है ऊपर से रोज़-रोज़ की गालियाँ और झाड क कारण पत्रकारों क सब्र का बांध टूट रहा है वहीँ दूसरी ओरपत्रकारिता में भी बाहुबल प्रदर्शन ने घुसपैठ कर दी है और पैसों की खातिर स्ट्रिंगर को पीटा जा रहा है. कुल मिलाकर आज पत्रकारिता नाम की कोई चीज़ नहीं है बस सब पैसों का खेल है. अब पत्रकार कोई सच्चाई आपके सामने नहीं परोसना चाहते वो सिर्फ वह तथ्य आपके सामने रखना चाहते हैं जिनसे उनकी जेब गर्म होती हो. पत्रकारिता बाज़ार तो बोहोत पहले ही बन गयी थी लेकिन परदे क पीछे का सच सामने आ गया है और इस चौथे स्तम्भ के लिए हानिकारक हो सकता है. लिखना कुछ और चाहती थी लेकिन भावनाओ के बहाव में जाने क्या क्या लिख बैठी. पहला ब्लॉग है और लिखने का कोई ख़ास शौर भी नहीं है मुझमें तो गुस्ताखियाँ माफ़ करें और सुधार के सुझाव भी दें धन्यवाद.
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acha issue uthaya or kafi acha likha. sahbdo ko dobara pado type karne k baad .. keep it up dear
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